लेखनी प्रतियोगिता -27-Nov-2022
मन हो हताश
तो क्यो हो उदास
मन को रखो खुश
फिर क्यो होगा
मन को दु:ख
मन उडे बादलो
मे जाये सात समंदर
पार मन को लगे
पंख तो उड जाये बार - बार
मन हो खुश तो
हर जगह हमे
हसी मिले
मन पर ही
निर्भर ये
जिंदगी है
भावना के जाल
मे जीव हे अटका
रिश्तेदारों मे
बिखराओ स्नेह
- अभिलाषा देशपांडे
Khan
28-Nov-2022 09:13 PM
👌🌸
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Gunjan Kamal
28-Nov-2022 07:00 PM
बहुत ही सुन्दर
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Muskan khan
28-Nov-2022 04:09 PM
Nice
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